माता समान पृथिवी के हम रक्षक
वेद मन्दिर, योल में 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने अथर्ववेद काण्ड 12 सूक्त 1 से ईश्वर कृत पृथिवी का ज्ञान देते हुए समझाया कि पृथिवी पर बढ़ता हुआ वैदिक सत्य कर्म, सत्य ज्ञान, दीक्षा, तपोमय जीवन, यज्ञ [देवपूजा, संगतिकरण, दान] समस्त पृथिवी को धारण करते हैं। भाव है कि यदि वेदों में कहे ये सब सत्य वैदिक कर्म न किए जाएँ तो पृथिवी नष्ट हो जाती है। आप स्वयं अनुमान लगाएँ कि दो विश्व युद्ध हो चुके हैं, तीसरा कभी भी हो सकता है। दूसरी विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि 1947 में विभाजन हुआ, उससे पहले भी हम, 800 वर्ष मुगलों के राज्य में एवं 200 वर्ष अंग्रेज़ों के राज्य में, हम महादुःखी थे, गुलाम कहाते थे। तीसरे विश्व युद्ध की भी संभावना हो सकती है और यदि युद्ध हो गया तो सम्पूर्ण विश्व अज्ञान/अंधकार/दुःखों के सागर में डूब जाएगा। अतः मन्त्र में ईश्वर उपदेश करता है कि हे प्राणियों! मुझसे प्रार्थना करो कि ईश्वर रचित जिस पवित्र भूमि पर समुद्र, नदियाँ, जल-धाराएँ, झरने, कुएँ हैं तथा अन्न और खेतियाँ उत्पन्न होकर हमें जीवित रखती हैं, वह भूमि व...