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Showing posts from May, 2026

वेद मन्दिर, योल में 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी

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योगाचार्य ने अथर्ववेद मन्त्र 12/1/4,5 की व्याख्या करते हुए उपदेश दिया कि जिस पृथिवी की पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण; ये चार बड़ी दिशा हैं जिसमें अन्न और खेतियाँ, वृक्ष तथा फल-फूल आदि अनेक जड़ी-बूटियाँ उत्पन्न होती हैं, जहाँ स्वाँस लेते हुए और चेष्टा करते हुए प्राणियों का पृथिवी पालन-पोषण करती है, वह हमारी मातृभूमि हमें गौ आदि दुधारू पशु, अन्न आदि से परिपूर्ण रखे। इस हमारी मातृभूमि पर हमारे पूर्वजों ने एक से एक बढ़कर कर्तव्य-कर्म किए और सुख पाया तथा शक्तिशाली हमारे पूर्वजों/देवताओं ने असुरों को पराजित किया। ऐसी सुखदायी पृथिवी माता हमें गऊओं, अश्वों आदि सुखदायी पशुओं तथा अन्न देने वाली पृथिवी हम प्राणियों को ऐश्वर्य, तेज एवं बल आदि दे। इसी कारण परमेश्वर ने अथर्ववेद मन्त्र 12/1/12 में हम सब नर-नारियों को उपदेश दिया है कि हे मनुष्यों! ऐसा कहो और मानो कि आप पृथिवी के पुत्र एवं पुत्रियाँ हो। क्योंकि पृथिवी हम सब प्राणियों का पालन-पोषण करती है। ध्यान रहे कि उक्त मन्त्र में ईश्वर ने यह समझाया है, "माता भूमिः पुत्रो अहम् पृथिव्याः" अर्थात् पृथिवी मेरी माता है और मैं पृथिवी...

मुख्यमंत्री की बेबसी और व्यवस्था परिवर्तन का खोखला नारा जनता के सामने उजागर : जयराम ठाकुर

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 *पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष ने कांगड़ा में कहा, सुक्खू सरकार के 'व्यवस्था परिवर्तन' की निकली हवा, ठियोग में करोड़ों का पानी घोटाला और टांडा अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली ने खोली दावों की पोल*  कांगड़ा/धर्मशाला: ​हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा बार-बार अलापा जा रहा 'व्यवस्था परिवर्तन' का राग अब धरातल पर पूरी तरह बेअसर और खोखला साबित हो रहा है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आ रही भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की खबरें दे रही हैं। कांगड़ा प्रवास के दौरान आज धर्मशाला से जारी प्रेस बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए पूछा है कि क्या यही वह विश्व स्तरीय स्वास्थ्य व्यवस्था है जिसका सपना मुख्यमंत्री जनता को दिखा रहे थे, जहां अस्पतालों के महत्वपूर्ण विभागों पर ताले लटके हैं और गरीब मरीज इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा, कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज की हृदय विदारक स्थिति सरकार के दावों की ध...

योल बाजार व्यापार मंडल की ओर से आज एक महत्वपूर्ण प्रेस नोट जारी किया गया, जिसमें बाजार के खाद्यान्न वस्तुओं से जुड़े व्यापारियों के साथ अनिल गैस एजेंसी द्वारा किए जा रहे कथित सौतेले व्यवहार पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है।

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व्यापार मंडल के अनुसार, योल बाजार में लगभग 8 से 10 खाद्यान्न संबंधित दुकानें हैं, जो पिछले कई वर्षों से अनिल गैस एजेंसी के माध्यम से एचपी गैस के कमर्शियल सिलेंडर प्राप्त करती रही हैं। एजेंसी की सप्लाई व्यवस्था पहले सुचारू और संतोषजनक थी, जिसके कारण सभी व्यापारी उसी पर निर्भर थे। किन्तु पिछले लगभग 80–90 दिनों से गैस आपूर्ति की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है। व्यापारियों का आरोप है कि एजेंसी द्वारा उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। आज स्थिति यह है कि किसी भी व्यापारी को नियमित रूप से एक भी कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जबकि जानकारी के अनुसार एजेंसी के गोदाम में हजारों सिलेंडर की आवक हो चुकी है और प्रतिदिन एक या दो छोटी गाड़ियों के माध्यम से अन्य स्थानों पर सप्लाई भी की जा रही है। व्यापार मंडल ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में योल बाजार में एक गाड़ी आई, जिसने केवल एक दुकान को ₹3200 में सिलेंडर दिया और बिना बिल प्रदान किए ही वापस चली गई। यह घटना पारदर्शिता और नियमों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कुछ दिन पूर्व योल बाजार के व्यापारी प्रतिनिधिमंडल ने धर्मशाला में...

माता समान पृथिवी के हम रक्षक

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वेद मन्दिर, योल में 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने अथर्ववेद काण्ड 12 सूक्त 1 से ईश्वर कृत पृथिवी का ज्ञान देते हुए समझाया कि पृथिवी पर बढ़ता हुआ वैदिक सत्य कर्म, सत्य ज्ञान, दीक्षा, तपोमय जीवन, यज्ञ [देवपूजा, संगतिकरण, दान] समस्त पृथिवी को धारण करते हैं। भाव है कि यदि वेदों में कहे ये सब सत्य वैदिक कर्म न किए जाएँ तो पृथिवी नष्ट हो जाती है। आप स्वयं अनुमान लगाएँ कि दो विश्व युद्ध हो चुके हैं, तीसरा कभी भी हो सकता है। दूसरी विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि 1947 में विभाजन हुआ, उससे पहले भी हम, 800 वर्ष मुगलों के राज्य में एवं 200 वर्ष अंग्रेज़ों के राज्य में, हम महादुःखी थे, गुलाम कहाते थे। तीसरे विश्व युद्ध की भी संभावना हो सकती है और यदि युद्ध हो गया तो सम्पूर्ण विश्व अज्ञान/अंधकार/दुःखों के सागर में डूब जाएगा। अतः मन्त्र में ईश्वर उपदेश करता है कि हे प्राणियों! मुझसे प्रार्थना करो कि ईश्वर रचित जिस पवित्र भूमि पर समुद्र, नदियाँ, जल-धाराएँ, झरने, कुएँ हैं तथा अन्न और खेतियाँ उत्पन्न होकर हमें जीवित रखती हैं, वह भूमि व...