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मुख्यमंत्री की बेबसी और व्यवस्था परिवर्तन का खोखला नारा जनता के सामने उजागर : जयराम ठाकुर

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 *पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष ने कांगड़ा में कहा, सुक्खू सरकार के 'व्यवस्था परिवर्तन' की निकली हवा, ठियोग में करोड़ों का पानी घोटाला और टांडा अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली ने खोली दावों की पोल*  कांगड़ा/धर्मशाला: ​हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा बार-बार अलापा जा रहा 'व्यवस्था परिवर्तन' का राग अब धरातल पर पूरी तरह बेअसर और खोखला साबित हो रहा है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आ रही भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की खबरें दे रही हैं। कांगड़ा प्रवास के दौरान आज धर्मशाला से जारी प्रेस बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए पूछा है कि क्या यही वह विश्व स्तरीय स्वास्थ्य व्यवस्था है जिसका सपना मुख्यमंत्री जनता को दिखा रहे थे, जहां अस्पतालों के महत्वपूर्ण विभागों पर ताले लटके हैं और गरीब मरीज इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा, कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज की हृदय विदारक स्थिति सरकार के दावों की ध...

योल बाजार व्यापार मंडल की ओर से आज एक महत्वपूर्ण प्रेस नोट जारी किया गया, जिसमें बाजार के खाद्यान्न वस्तुओं से जुड़े व्यापारियों के साथ अनिल गैस एजेंसी द्वारा किए जा रहे कथित सौतेले व्यवहार पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है।

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व्यापार मंडल के अनुसार, योल बाजार में लगभग 8 से 10 खाद्यान्न संबंधित दुकानें हैं, जो पिछले कई वर्षों से अनिल गैस एजेंसी के माध्यम से एचपी गैस के कमर्शियल सिलेंडर प्राप्त करती रही हैं। एजेंसी की सप्लाई व्यवस्था पहले सुचारू और संतोषजनक थी, जिसके कारण सभी व्यापारी उसी पर निर्भर थे। किन्तु पिछले लगभग 80–90 दिनों से गैस आपूर्ति की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है। व्यापारियों का आरोप है कि एजेंसी द्वारा उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। आज स्थिति यह है कि किसी भी व्यापारी को नियमित रूप से एक भी कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जबकि जानकारी के अनुसार एजेंसी के गोदाम में हजारों सिलेंडर की आवक हो चुकी है और प्रतिदिन एक या दो छोटी गाड़ियों के माध्यम से अन्य स्थानों पर सप्लाई भी की जा रही है। व्यापार मंडल ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में योल बाजार में एक गाड़ी आई, जिसने केवल एक दुकान को ₹3200 में सिलेंडर दिया और बिना बिल प्रदान किए ही वापस चली गई। यह घटना पारदर्शिता और नियमों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कुछ दिन पूर्व योल बाजार के व्यापारी प्रतिनिधिमंडल ने धर्मशाला में...

माता समान पृथिवी के हम रक्षक

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वेद मन्दिर, योल में 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने अथर्ववेद काण्ड 12 सूक्त 1 से ईश्वर कृत पृथिवी का ज्ञान देते हुए समझाया कि पृथिवी पर बढ़ता हुआ वैदिक सत्य कर्म, सत्य ज्ञान, दीक्षा, तपोमय जीवन, यज्ञ [देवपूजा, संगतिकरण, दान] समस्त पृथिवी को धारण करते हैं। भाव है कि यदि वेदों में कहे ये सब सत्य वैदिक कर्म न किए जाएँ तो पृथिवी नष्ट हो जाती है। आप स्वयं अनुमान लगाएँ कि दो विश्व युद्ध हो चुके हैं, तीसरा कभी भी हो सकता है। दूसरी विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि 1947 में विभाजन हुआ, उससे पहले भी हम, 800 वर्ष मुगलों के राज्य में एवं 200 वर्ष अंग्रेज़ों के राज्य में, हम महादुःखी थे, गुलाम कहाते थे। तीसरे विश्व युद्ध की भी संभावना हो सकती है और यदि युद्ध हो गया तो सम्पूर्ण विश्व अज्ञान/अंधकार/दुःखों के सागर में डूब जाएगा। अतः मन्त्र में ईश्वर उपदेश करता है कि हे प्राणियों! मुझसे प्रार्थना करो कि ईश्वर रचित जिस पवित्र भूमि पर समुद्र, नदियाँ, जल-धाराएँ, झरने, कुएँ हैं तथा अन्न और खेतियाँ उत्पन्न होकर हमें जीवित रखती हैं, वह भूमि व...

ईश्वर उत्पन्न चारों वेद ही सत्य विद्यायुक्त हैं

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वेद मन्दिर, योल (हि.प्र.) में 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने ऋग्वेद मन्त्र 1/105/14 एवं 15 में जो ईश्वर ने संसार को विद्या दी है, उसे समझाते हुए कहा कि हे मनुष्यों! आप जो वेदों का ज्ञाता विद्वान्, जिसके आचरण में वेद विद्या है, और वह योगाभ्यासी है, उस अत्यन्त ज्ञानी से पापों का नाश करने के लिए वेद विद्या और शिक्षा को ग्रहण करें। मन्त्र का भाव यह है कि कोई भाग्यहीन प्राणी ही होंगे जो ऐसे विद्वानों से शिक्षा न लेकर वेद विद्या के विरोधी होंगे। स्वामी जी ने पुनः मन्त्रों से ज्ञान दिया कि मनुष्य के जब पिछले जन्मों में किए शुभ कर्मों का फल और वर्तमान जन्म में किए वेदानुकूल क्रियमाण कर्म भोगने का समय आता है तब ही उस मनुष्य पर परमेश्वर की कृपा होती है। और वह मनुष्य वेद मार्ग पर चलकर अपने पापों का नाश करके परमेश्वर को प्राप्त करता है। अतः स्वामी जी ने अगले वेद मन्त्र 16 से समझाया कि ईश्वर से उत्पन्न यह अनादि, अनन्त, सनातन, अविनाशी जो वेद मार्ग है केवल वही सत्य मार्ग है अतः इस सत्य वेद मार्ग पर चलकर सत्य विद्याओं को प्राप्त करके मनु...

धर्मशाला में सुधीर ने नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस को दिया झटका

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  दो सौ से अधिक ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का थामा दामन  कांग्रेस को बूथ लगाने को नहीं मिलेंगे कार्यकर्ता  लोक तंत्र की पहली सीढ़ी की मजबूती के लिए पहला कदम: सुधीर  धर्मशाला । नगर निगम धर्मशाला और पंचायती राज चुनाव से ठीक पहले धर्मशाला के विधायक श्री सुधीर शर्मा ने कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया है । बुधवार को सिद्धपुर में निजी रेस्तरां में आयोजित समारोह में दो सौ से अधिक लोग कांग्रेस और एनएसयूआई छोड़ भाजपा परिवार में शामिल हुये, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एन एस यू आई के पदाधिकारी व पूर्व में चुने हुये प्रतिनिधि रहे । पूर्व में युवा कांग्रेस के अध्यक्ष श्री अभिषेक शेखू ने भाजपा को जॉइन किया था, आज उनकी मौजूदगी में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र से 60 युवाओं ने भाजपा की सदस्यता ली, जबकि भाजपा मंडल ग्रामीण के युवा मोर्चा अध्यक्ष श्री अंकु बादल की अध्यक्षता में 62 युवाओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की । इसके अलावा विभिन्न वार्डों से बड़ी संख्या में कांग्रेस छोड़ लोग भाजपा में शामिल हुए । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक श्री सुधीर शर्मा जी ने कहा की...

वेद मन्दिर, योल (हि.प्र.) में 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने ऋग्वेद मन्त्र 10/181/1 से समझाया कि ईश्वर की सामर्थ्य से सृष्टि रचना के आरम्भ में चार वेद अग्नि, वायु, आदित्य एवं अंगिरा ऋषि के हृदय में प्रकट हुए

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   ब्रह्मा ने चारों ऋषियों की सेवा करके अकेले ही चारों वेदों का ज्ञान प्राप्त किया। ब्रह्मा चारों ऋषियों का शिष्य बना और इस सृष्टि में ब्रह्मा के द्वारा गुरु-शिष्य परम्परा प्रारम्भ हुई, जो आज तक चली आ रही है एवं जिज्ञासु वेद का ज्ञान इस परम्परा द्वारा ग्रहण कर रहे हैं। यह याद रहे कि ज्ञान तब होता है जब कोई ज्ञान दे। जैसे श्रीकृष्ण ने ज्ञान अर्जुन को दिया इत्यादि। अतः हम समझें कि सर्वप्रथम ईश्वर ने चार ऋषियों को वेद का ज्ञान दिया, तब ऋषियों को ज्ञान हुआ। पुनः चार ऋषियों ने ब्रह्मा को यह ज्ञान दिया एवं ब्रह्मा ने गुर-शिष्य परम्परा से यह वेद का ज्ञान संसार में फैलाया। स्वामी जी ने ऋग्वेद मन्त्र 1/10/1 का उदाहरण देते हुए समझाया कि परमेश्वर द्वारा दिया यह वैदिक ज्ञान प्राप्त करके भिन्न-भिन्न पुरुषों ने भिन्न-भिन्न प्रकार से वेदों द्वारा ही इस एक परमेश्वर की पूजा की। मन्त्र में ज्ञान है कि जिन साधकों को छन्द, राग आदि का ज्ञान हुआ, वे सामवेद से परमेश्वर का गुणगान करते हैं और जो साधक वेद मन्त्रों को उच्चारण करने के अभ्यासी हैं, वे वेद मन्त्रों से परमेश्वर की पूजा करते हैं...

वेद मन्दिर, योल (हि.प्र.) में 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने ऋग्वेद मन्त्र 10/125/4 की व्याख्या करते हुए समझाया कि इस मन्त्र में परमेश्वर कहता है

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         कि हे नर-नारियों! आप मेरा अन्न खाते हो, मेरी दी हुई आँखों से देखते हो और प्राण लेते हो एवं अन्य प्राणियों द्वारा कहे हुए विषयों को सुनते हो परन्तु मुझ परमेश्वर को नहीं मानते, वेद वाणी सत्य वचन कहती है कि आप नाश को प्राप्त होते हैं ।    कुछ इसी प्रकार का सत्य ज्ञान परमेश्वर ने यजुर्वेद मन्त्र 2/23 में इस प्रकार कहा है कि हे नर-नारियों! आपने मेरे यज्ञ त्याग दिए हैं फलस्वरूप  मैंने भी तुम्हें दुःख देने के लिए त्याग दिया है। सारांश यही है कि वेदों में वर्णित ईश्वर को हम जानें क्योंकि परमेश्वर ने अपना सच्चा रूप वेदों में ही वर्णित किया है और उस परमेश्वर को जानकर ही वेदों में उपदेश की हुई विद्या से, परमेश्वर की उपासना करके हम अपने लोक और परलोक, दोनों को, सुखमय जीवन एवं ईश्वर प्राप्ति करने योग्य बनावें। यह वेदों में ईश्वर की आज्ञा है।

भारतीय संस्कृति केवल संस्कृत भाषा में ही विद्यमान है

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वेद मंदिर, योल, हिमाचल प्रदेश में चल रहे 78 दिवसीय, चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने जिज्ञासुओं को वेदों से उपदेश किया कि वर्तमान सृष्टि की उत्पत्ति 1 अरब, 96 करोड़ , 8 लाख , 53 हज़ार , 127 वर्ष पहले हुई है। सृष्टि उत्पत्ति से पहले प्रलय काल चल रहा था। अत: उस समय संसार में कोइ भी प्राणी अथवा कोई भी पदार्थ नहीं था। उस समय कोई आचार्य अथवा गुरु भी नहीं थे जो सृष्टि उत्पत्ति के बाद मनुष्य को ज्ञान दे सकें। ऋग्वेद मंत्र 1/22/3 में स्पष्ट उपदेश है कि ज्ञान दिए बिना ज्ञान नहीं होता। अतः ईश्वर ने जब प्रकृति को लेकर इस ब्रह्माण्ड की रचना की तब सृष्टि में उत्पन्न प्राणियों को ज्ञान देने वाला कोई भी गुरु नहीं था। इस विषय में उपदेश करते हुए ऋषि पताञ्जलि ने योग शास्त्र सूत्र 1/26 में उपदेश दिया है कि वह ईश्वर हमारे पूर्व अर्थात् पिछली सृष्टियों के गुरुओं का भी गुरु है क्योंकि पिछली सष्टियों के गुरु तो शरीर छोड़ चुके होते हैं परंतु परमेश्वर मृत्यु के बंधन से रहित है। अत: प्रत्येक सृष्टि का प्रथम गुरु परमेश्वर ही होता है और ऋग्वेद मन्त्र 10/181/1,2...

क्या हम भारतियों को अपनी संस्कृति पर गर्व है

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तिथि -- 25/04/2026 स्वामी राम स्वरूप, योगाचार्य  वेद मंदिर योल कैंप (हि.प्र.) वेद मंदिर, योल, हिमाचल प्रदेश में चल रहे 78 दिवसीय, चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने "हिन्दु" शब्द पर प्रकाश डालते हुए जिज्ञासुओं को समझाया कि हिन्दु धर्म केवल अनादि एवं अविनाशी चारों वेदों पर आधारित धर्म है। ईश्वर से उत्पन्न चारों वेद वर्तमान में भी मनुष्य मात्र को अति प्राचीन जीवंत धर्म ग्रंथ के रूप में प्राप्त हैं। वेदों पर आधारित होने के कारण ही हमारे देश का नाम भी हमारे ऋषि--मुनियों ने ऋग्वेद मंत्र 10/110/8 एवं ऋग्वेद मंत्र 1/22/10 के आधार पर भारतीम् अर्थात् भारत रखा है। यास्क मुनि कृत निरूक्त ग्रंथ में कहा "भरत आदित्यः" अर्थात् भरत सूर्य को कहते हैं। अतः भारती शब्द का अर्थ है "सूर्य की ज्योति"। अतः हमारा देश सूर्य की ज्योति के समान वैदिक ज्ञान से सदा चमकता और दमकता रहा है। हमारे देश का नाम "भारतवर्ष" है। अथर्ववेद मंत्र 4/15/4 के अनुसार वर्ष का अर्थ मेघ है। मेघ वर्षा करता है और हमारा देश ईश्वरीय उत्पन्न वेदों...

ईश्वर को जानो

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78 दिवसीय चल रहे चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने समझाया कि जिस परमेश्वर की हम पूजा करना चाहते हैं उस परमेश्वर के विषय में प्रथम यह जानना परमावश्यक है कि परमेश्वर किसे कहते हैं और उसकी उपासना किस प्रकार की जाती है। यह सब दुर्लभ, अद्भुत एवं असीम ज्ञान हम केवल सृष्टि रचना के आरम्भ में ईश्वर की सामर्थ्य से ईश्वर से उत्पन्न चारों वेद जो चार ऋषियों के हृदय में प्रकट होते हैं उन्हें जानना आवश्यक है। वेदों की उत्पत्ति का वर्णन ऋग्वेद मंत्र 10/181/1 में तथा 10/109/1 में विस्तार से ईश्वर ने ही समझाया है। किसी विद्वान् से इनका वर्णन सुनना परमावश्यक है। अत: हम ईश्वर के विषय में यहाँ तनिक सा ज्ञान वेदों से दे रहे हैं कि ईश्वर किसे कहते हैं? ऋग्वेद मंत्र 10/129/2 में ईश्वर ने उपदेश किया है कि जब प्रलय में सब संसार प्रकृति के रूप में आ जाता है अर्थात् अदर्शनीय हो जाता है, यह जन्म-मृत्यु, दिन-रात और संसार का कोई भी पदार्थ नहीं होता तब उस प्रलय में भी "स्वधया आनीत्" अर्थात् स्वयं की धारण शक्ति से, स्वयं सत्ता रूप स्वयंभू एक जीता-...