वेद मन्दिर, योल (हि.प्र.) में 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने ऋग्वेद मन्त्र 10/125/4 की व्याख्या करते हुए समझाया कि इस मन्त्र में परमेश्वर कहता है
कि हे नर-नारियों! आप मेरा अन्न खाते हो, मेरी दी हुई आँखों से देखते हो और प्राण लेते हो एवं अन्य प्राणियों द्वारा कहे हुए विषयों को सुनते हो परन्तु मुझ परमेश्वर को नहीं मानते, वेद वाणी सत्य वचन कहती है कि आप नाश को प्राप्त होते हैं । कुछ इसी प्रकार का सत्य ज्ञान परमेश्वर ने यजुर्वेद मन्त्र 2/23 में इस प्रकार कहा है कि हे नर-नारियों! आपने मेरे यज्ञ त्याग दिए हैं फलस्वरूप मैंने भी तुम्हें दुःख देने के लिए त्याग दिया है। सारांश यही है कि वेदों में वर्णित ईश्वर को हम जानें क्योंकि परमेश्वर ने अपना सच्चा रूप वेदों में ही वर्णित किया है और उस परमेश्वर को जानकर ही वेदों में उपदेश की हुई विद्या से, परमेश्वर की उपासना करके हम अपने लोक और परलोक, दोनों को, सुखमय जीवन एवं ईश्वर प्राप्ति करने योग्य बनावें। यह वेदों में ईश्वर की आज्ञा है।