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धर्मशाला नगर निगम चुनाव में भाजपा बड़ी जीत दर्ज करेगी : पवन काजल

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*कहा सभी 17 वार्डों में भाजपा स्पष्ट रणनीति के दम पर चुनाव जीतेगी* *बोले चुनाव से पहले ही सुक्खू सरकार अपनी हार मान चुकी*  *धर्मशाला, 9 मई 2026* कांगड़ा के भाजपा विधायक, प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष एवं नगर निगम धर्मशाला चुनाव प्रभारी पवन काजल ने शनिवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नगर निगम के सभी 17 वार्डों से भाजपा के सभी उम्मीदवार भारी बहुमत से अपनी जीत दर्ज करेंगे। उन्होंने कहा कि इन चुनावों में जनता सुक्खू सरकार को उसी की भाषा परिभाषा में जवाब देगी। विधायक पवन काजल ने कहा कि नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी बड़ी जीत दर्ज करेगी। जनता नगर निगम चुनावों में भाजपा की विकासकारी नीतियों पर मुहर लगाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों को जनता के बीच ले जाकर उसका पर्दाफाश करेगी। कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में जनता को केवल निराश किया है और अब नगर निगम चुनावों में जनता इसका जवाब देगी। कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल में जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है। उन्होंने कहा कि नगर निगम धर्मशाला के पिछले 5 वर्ष के कार्यकाल की खामि...

नशा मुक्त चुनाव से ही सुरक्षित होगा युवाओं का भविष्य : ज्ञान विज्ञान समिति

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लेहसर पंचायत से शुरू हुआ “जागरूक मतदाता-सुरक्षित भविष्य” अभियान मनोज चंदेल -अनंत ज्ञान -योल हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति धरमशाला ब्लॉक की ओर से शनिवार को योल कस्बे की लेहसर पंचायत से “नशा मुक्त चुनाव-जागरूक मतदाता, सुरक्षित भविष्य, ईमानदार वोट-बेहतर आज और उज्ज्वल कल” अभियान की शुरुआत की गई। अभियान के तहत समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने लोगों को नशा मुक्त एवं स्वच्छ चुनाव के प्रति जागरूक किया। समिति के ब्लॉक सेक्रेटरी मनोज चंदेल और अध्यक्ष स्वर्णलता की अगवाई में निकले डेलिगेशन ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि चुनावों के दौरान कई बार उम्मीदवार वोट हासिल करने के लिए शराब, नशीले पदार्थ और पैसे बांटने जैसे गलत तरीकों का सहारा लेते हैं। यह केवल वोट खरीदने का मामला नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बर्बाद करने वाला गंभीर अपराध है। वक्ताओं ने कहा कि नशे की गिरफ्त में आने के बाद कई युवा अपराध, हिंसा और गलत रास्तों की ओर बढ़ जाते हैं। नशा परिवारों में झगड़े, आर्थिक संकट और सामाजिक अस्थिरता का कारण बनता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जागरूक मतदाता बनें और नश...

वेद मन्दिर, योल (हि.प्र.) में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 28वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने ऋग्वेद मन्त्र 7/67/8 के विषय में समझाया कि परमेश्वर मन्त्र में स्वयं ज्ञान देते हुए उपदेश कर रहे हैं कि सर्वशक्तिमान् परमेश्वर सब नर-नारियों का, एक समान उपासना करने योग्य, देव है।

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वर्तमान काल में वेद विरुद्ध यह जो मनुष्यों ने स्वयं नियम निर्धारित किए हैं कि अमुक नर-नारी अमुक जाति का होने के कारण ईश्वर भक्ति नहीं कर सकता, यह ईश्वर को अप्रसन्न करने वाली क्रिया है। हम वेद विद्या को समझें और सब मिलजुल कर प्यार से शुभ कर्म करें एवं उस एक परमात्मा की उपासना करें जो सर्वशक्तिमान् है तथा सर्वव्यापक, सृष्टि रचयिता है। उपासना करने के विषय में उपनिषद् में श्रवण, मनन एवं निदिध्यासन ये तीन वैदिक शुभ कर्म कहे गए हैं। सामवेद मन्त्र 50 में कहा "श्रुधि श्रुत्कर्ण" अर्थात् हे सुनने में समर्थ प्राणी! तू वेदों से परमात्मा का उपदेश सुन। स्वामी जी ने अथर्ववेद मन्त्र 1/1/4 में परमेश्वर ने स्पष्ट उपदेश किया है कि हे परमेश्वर! मैं वेद सुनना कभी न छोड़ूँ। पुनः सुने हुए वेद मन्त्रों के अर्थ एवं भाव समझकर, उन पर मन द्वारा गहन विचार करने का नाम मनन है। जब मनन करने के पश्चात् उस वेद मन्त्र का ज्ञान बुद्धि में स्थिर हो जाता है तो उस ज्ञान को जीवन में अपनाने का नाम निदिध्यासन है। दुःख यही है कि जीव ज्ञान सुन भी ले तो बिरला ही कोई वैदिक ज्ञान को जीवन में धारण करता है। उदाह...

वेद मन्दिर, योल में चल रहे चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 27वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने ऋग्वेद मन्त्र 1/22/3 का भाव समझाते हुए कहा कि "ज्ञान दिए बिना किसी को भी ज्ञान नहीं हो सकता"।

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अतः एक तो ज्ञानी, ज्ञान देने वाला होना चाहिए, दूसरा जिज्ञासु होना चाहिए, जो ज्ञान लेना चाहता है। मन्त्र में यह भी भाव है कि मनुष्य को विद्वानों से निरन्तर वेद विद्या का उपदेश सुनना चाहिए। अतः जब सृष्टि रचना के आरम्भ में कोई गुरु अथवा वेद का ज्ञानी, इत्यादि महात्मा नहीं होते तब परमेश्वर स्वयं वेदों का ज्ञान अग्नि, वायु, आदित्य एवं अंगिरा; इन चार ऋषियों को देता है और योग शास्त्र सूत्र 1/26 के अनुसार ऋषियों का प्रथम गुरु परमेश्वर होता है। परमेश्वर निराकार है। अतः परमेश्वर का मुख भी नहीं है। अतः वह बोलकर ज्ञान नहीं दे सकता। परन्तु सर्वशक्तिमान्, सर्वसमर्थ होने के कारण परमेश्वर अपनी सामर्थ्य से, इन चार ऋषियों के हृदय में चारों वेदों का ज्ञान प्रकट करता है। पुनः ब्रह्मा उक्त चार ऋषियों से, अकेले ही वेदों का ज्ञान प्राप्त करके, इन चार ऋषियों का शिष्य कहलाया। तत्पश्चात् ब्रह्मा द्वारा गुरु-शिष्य परम्परा प्रारम्भ हुई, जो आज तक चली आ रही है। अतः हमें वेदों के ज्ञाता, तपस्वी से आज भी वेदों का ज्ञान प्राप्त करके एवं वेद विद्या का आचरण करके अपना जीवन सुखी करना चाहिए। इस गुरु-शिष्य परम्प...

वेद मन्दिर, योल में चल रहे चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 26वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने ऋग्वेद मन्त्र

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 1/14/2 पर प्रकाश डालते हुए जिज्ञासुओं को समझाया कि जगत् की रचना को देखकर मनुष्य को यह कहना चाहिए कि यह रचना ईश्वर के अतिरिक्त कोई भी अन्य प्राणी नहीं रच सकता। अतः इस अनुमान प्रमाण से यह सिद्ध है कि हम इस एक ईश्वर की ही स्तुति, प्रार्थना एवं उपासना; ईश्वर से उत्पन्न वेद मन्त्रों से ही करें और मन्त्रों को जानने के लिए किसी वेद ज्ञाता, आचार्य की शरण में जाएँ। मन्त्र में स्पष्ट उपदेश है कि हे वेदज्ञ विद्वान्! जैसे तेरी बुद्धि जिस ईश्वर के गुणगान, उपासना एवं प्रार्थना करती है, हम जिज्ञासु भी उसी प्रकार एक ईश्वर की उपासना करते रहें। स्वामी जी ने पुनः कहा कि इस मन्त्र के यह भाव सामवेद मन्त्र 744 के अनुरूप हैं। चारों वेद ईश्वर से उत्पन्न अनादि, अनन्त एवं अविनाशी हैं। अतः उक्त सामवेद मन्त्र 744 भी ईश्वर से उत्पन्न अनादि, अनन्त, अविनाशी एवं पूर्णतः सत्य है। वेद स्वतः प्रमाण में आते हैं। अब देखिए उक्त सामवेद मन्त्र में सत्य प्रार्थना है कि हे परमेश्वर! मैं आपकी स्तुति करता हूँ। इससे पूर्व मेरे आचार्य/गुरु ने आपकी स्तुति की है। मन्त्र का भी यही भाव है कि ईश्वर की पूजा वस्तुतः अनाद...

वेद मन्दिर, योल में चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 24वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने ऋग्वेद मन्त्र 1/26/5 से उपदेश किया है कि मनुष्य का जन्म भोग योनि एवं कर्म योनि की श्रेणी में आता है।

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 इस योनि में यजुर्वेद मन्त्र 7/48 के अनुसार प्रत्येक नर-नारी अच्छा-बुरा, कोई भी कर्म करने के लिए स्वतन्त्र है परन्तु कर्मों का फल प्राप्त करने के परतन्त्र है। प्रत्येक जीव को कर्म फल तो केवल सर्वव्यापक, सृष्टि रचयिता परमेश्वर ही देता है। पुण्यवान् कर्मों का फल सुखदायी है और पाप कर्मों का फल अति दुःखदायी है। अतः हम पाप कर्मों से बचें और पुण्यवान् कर्मों के लिए वेदाध्ययन करके, उन कर्मों को जानें। वेदों के अतिरिक्त शुभ-पुण्यवान् कर्मों का वर्णन विस्तार, गूढ़ता एवं रहस्यपूर्ण विधि से अन्य कहीं उपलब्ध नहीं है क्योंकि वेद विद्या ईश्वर से उत्पन्न अनादि एवं अविनाशी विद्या है। मनुष्य तो इस विद्या के उत्पन्न होने के पश्चात् ही ऋषियों द्वारा इस विद्या से शिक्षा ले-लेकर विद्वान् बनते हैं। यह सुन्दर पृथिवी हम सब मनुष्यों के कर्म करने का विशाल क्षेत्र है। ऐसा ऋग्वेद मन्त्र 10/135/1 में ईश्वर का उपदेश है। तथा सर्वशक्तिमान् परमेश्वर जो हमें पालने वाला पिता-परमेश्वर है, वह कर्मों के अनुसार हमें फल देता है। यह ज्ञान हमें समझना चाहिए और हमें वेद मार्ग पर चलकर अपना जीवन सुधारना चाहिए। पुनः...

वेद मन्दिर, योल (हि.प्र.) में 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने ऋग्वेद मन्त्र 1/164/20 की व्याख्या करते हुए श्रद्धालुओं को ईश्वर और जीवात्मा के विषय में समझाया।

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 उन्होंने कहा कि उक्त मन्त्र का परमेश्वर ने अलंकार युक्त भाषा में उपदेश किया है कि सुन्दर पंखों वाले, एक समान सम्बन्ध रखने वाले, मित्रों के समान दो पक्षी एक वृक्ष पर आश्रय लेते हैं। इनमें से एक पक्षी वृक्ष के पके फल को खाता है और दूसरा पक्षी फल को नहीं खाता। परन्तु यह दूसरा पक्षी सब ओर से देखता है। मन्त्र में वृक्ष को "मानव शरीर" कहा है और फल खाने वाले पक्षी को "जीवात्मा"। जैसे वृक्ष को काटा जाता है अथवा वृक्ष समय आने पर सूख जाता है, गिर जाता है। इसी प्रकार मानव शरीर भी वृद्धावस्था में कष्टों को सहता हुआ नष्ट हो जाता है। जिसे जीवात्मा रूप पक्षी कहा है वह वृक्ष के फलों को खाता है। भाव यह है कि जीवात्मा अपने किए हुए कर्मों पुण्यवान् अथवा पाप कर्म का फल क्रमशः सुख- दुःख के रूप में भोगता है। और दूसरा पक्षी परमेश्वर कहा गया है जो पाप एवं पुण्य कर्म फल नहीं भोगता। परन्तु सर्वव्यापक होने के कारण सब जीवों को सब ओर से देखता है और मनुष्य के अच्छे-बुरे किए कर्मों का फल देता है।       इसी उपदेश को योगेश्वर श्रीकृष्ण महाराज ने अलंकारिक भाषा में भगवद्गीता श्लोक 15...

वेद मन्दिर, योल (हि.प्र.) में 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने ऋग्वेद मन्त्र 1/164/20 की व्याख्या करते हुए श्रद्धालुओं को ईश्वर और जीवात्मा के विषय में समझाया।

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 उन्होंने कहा कि उक्त मन्त्र का परमेश्वर ने अलंकार युक्त भाषा में उपदेश किया है कि सुन्दर पंखों वाले, एक समान सम्बन्ध रखने वाले, मित्रों के समान दो पक्षी एक वृक्ष पर आश्रय लेते हैं। इनमें से एक पक्षी वृक्ष के पके फल को खाता है और दूसरा पक्षी फल को नहीं खाता। परन्तु यह दूसरा पक्षी सब ओर से देखता है। मन्त्र में वृक्ष को "मानव शरीर" कहा है और फल खाने वाले पक्षी को "जीवात्मा"। जैसे वृक्ष को काटा जाता है अथवा वृक्ष समय आने पर सूख जाता है, गिर जाता है। इसी प्रकार मानव शरीर भी वृद्धावस्था में कष्टों को सहता हुआ नष्ट हो जाता है। जिसे जीवात्मा रूप पक्षी कहा है वह वृक्ष के फलों को खाता है। भाव यह है कि जीवात्मा अपने किए हुए कर्मों पुण्यवान् अथवा पाप कर्म का फल क्रमशः सुख- दुःख के रूप में भोगता है। और दूसरा पक्षी परमेश्वर कहा गया है जो पाप एवं पुण्य कर्म फल नहीं भोगता। परन्तु सर्वव्यापक होने के कारण सब जीवों को सब ओर से देखता है और मनुष्य के अच्छे-बुरे किए कर्मों का फल देता है।       इसी उपदेश को योगेश्वर श्रीकृष्ण महाराज ने अलंकारिक भाषा में भगवद्गीता श्लोक 15...

इंदिरा गांधी सुख सम्मान निधि के भरवाए गए 10 लाख फॉर्म्स का हिसाब मांग रही मातृ शक्ति : जयराम ठाकुर

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   *महिलाओं को हक देने की बजाय शगुन, कन्यादान और बेटी है अनमोल जैसी योजनाएं ठप*  शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन वाली सुख की सरकार को बने साढ़े तीन साल का समय पूरा हो चुका है। चुनाव के समय ही कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रदेश की 18 से 59 साल की महिलाओं को हर महीने ₹1500 देने की गारंटी दी थी। चुनाव के समय ही कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदेश की महिला शक्ति से 1500 रुपए के फॉर्म भरवाए गए थे, जो कांग्रेस मुख्यालय समेत अन्य कांग्रेस के ऑफिसों में धूल खाते रहे। लोकसभा चुनाव के समय फिर से मुख्यमंत्री द्वारा इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि की घोषणा की गई, लेकिन इस बार सुख की सरकार ने पात्रता की कई शर्तें रखीं, जो कि वास्तव में हैरान करने वाली थीं। इसके बाद भी प्रदेश में लगभग 10 लाख महिलाओं ने इस सम्मान निधि का फॉर्म भरा। जिसके लिए उन्होंने जरूरी कागज बनवाने में भी अपना समय और पैसा खर्च किया और बार-बार कार्यालय के चक्कर काटकर भी परेशानी उठाई। इस योजना की घोषणा को दो साल से ज्य...

नगर निगम चुनावों में कांग्रेस का होगा सूपड़ा साफ, भाजपा बनाएगी पूर्ण बहुमत की सरकार: विश्व चक्षु

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*जनता का गुस्सा बनेगा कांग्रेस की करारी हार का कारण* *सुक्खू सरकार पर जनता का वार, नगर निगम चुनाव में तय हार* *धर्मशाला: 03 अप्रैल, 2026* भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी एडवोकेट विश्व चक्षु ने धर्मशाला से जारी अपने बयान में कहा है कि हिमाचल प्रदेश में होने वाले नगर निगम चुनावों में कांग्रेस का पूरी तरह सफाया तय है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा प्रदेश के सभी नगर निगमों में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। विश्व चक्षु ने कहा कि प्रदेश की शहरी जनता वर्तमान कांग्रेस सरकार की नीतियों और कार्यशैली से बेहद निराश है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों में सुस्ती, बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी ने जनता को कांग्रेस के खिलाफ खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव “सत्ता का सेमीफाइनल” हैं, जो प्रदेश की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे। उनके अनुसार, जनता ने भाजपा के पक्ष में मतदान करने का मन बना लिया है और पार्टी को स्पष्ट जनादेश मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए विश्व चक्षु ने कहा कि सरकार हर मोर्चे पर वि...