ईश्वर उत्पन्न चारों वेद ही सत्य विद्यायुक्त हैं


वेद मन्दिर, योल (हि.प्र.) में 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने ऋग्वेद मन्त्र 1/105/14 एवं 15 में जो ईश्वर ने संसार को विद्या दी है, उसे समझाते हुए कहा कि हे मनुष्यों! आप जो वेदों का ज्ञाता विद्वान्, जिसके आचरण में वेद विद्या है, और वह योगाभ्यासी है, उस अत्यन्त ज्ञानी से पापों का नाश करने के लिए वेद विद्या और शिक्षा को ग्रहण करें। मन्त्र का भाव यह है कि कोई भाग्यहीन प्राणी ही होंगे जो ऐसे विद्वानों से शिक्षा न लेकर वेद विद्या के विरोधी होंगे।
स्वामी जी ने पुनः मन्त्रों से ज्ञान दिया कि मनुष्य के जब पिछले जन्मों में किए शुभ कर्मों का फल और वर्तमान जन्म में किए वेदानुकूल क्रियमाण कर्म भोगने का समय आता है तब ही उस मनुष्य पर परमेश्वर की कृपा होती है। और वह मनुष्य वेद मार्ग पर चलकर अपने पापों का नाश करके परमेश्वर को प्राप्त करता है।
अतः स्वामी जी ने अगले वेद मन्त्र 16 से समझाया कि ईश्वर से उत्पन्न यह अनादि, अनन्त, सनातन, अविनाशी जो वेद मार्ग है केवल वही सत्य मार्ग है अतः इस सत्य वेद मार्ग पर चलकर सत्य विद्याओं को प्राप्त करके मनुष्य जन सुख प्राप्त करें और आनन्द प्राप्त करें।

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