क्या हम भारतियों को अपनी संस्कृति पर गर्व है
तिथि -- 25/04/2026 स्वामी राम स्वरूप, योगाचार्य
वेद मंदिर योल कैंप (हि.प्र.)
वेद मंदिर, योल, हिमाचल प्रदेश में चल रहे 78 दिवसीय, चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने "हिन्दु" शब्द पर प्रकाश डालते हुए जिज्ञासुओं को समझाया कि हिन्दु धर्म केवल अनादि एवं अविनाशी चारों वेदों पर आधारित धर्म है। ईश्वर से उत्पन्न चारों वेद वर्तमान में भी मनुष्य मात्र को अति प्राचीन जीवंत धर्म ग्रंथ के रूप में प्राप्त हैं। वेदों पर आधारित होने के कारण ही हमारे देश का नाम भी हमारे ऋषि--मुनियों ने ऋग्वेद मंत्र 10/110/8 एवं ऋग्वेद मंत्र 1/22/10 के आधार पर भारतीम् अर्थात् भारत रखा है। यास्क मुनि कृत निरूक्त ग्रंथ में कहा "भरत आदित्यः" अर्थात् भरत सूर्य को कहते हैं। अतः भारती शब्द का अर्थ है "सूर्य की ज्योति"। अतः हमारा देश सूर्य की ज्योति के समान वैदिक ज्ञान से सदा चमकता और दमकता रहा है। हमारे देश का नाम "भारतवर्ष" है। अथर्ववेद मंत्र 4/15/4 के अनुसार वर्ष का अर्थ मेघ है। मेघ वर्षा करता है और हमारा देश ईश्वरीय उत्पन्न वेदों के ज्ञान की वर्षा करता रहा है, जिस कारण पिछले तीन युगों में जब वेद ज्ञान की वर्षा होती रही, तब-तब भारतवर्ष अन्न, धन और समस्त सामग्री,आनन्द एवं निरोगता आदि से सुखमय जीवन व्यतीत करता रहा। निरूक्त ग्रंथ में यह भी कहा है कि हमारे यज्ञ में ज्योति शीघ्र हो। भारतवर्ष के नागरिकों ने सदा से स्वयं को भारतवासी ही कहा है। हिन्दु शब्द तो केवल विदेशियों ने प्रयोग किया है।
हिन्दु शब्द का संबोधन विदेशियों ने उस समुदाय के लिए किया जो सिन्धु नदी के उस पार निवास करते थे। अतः हम भारतवासी हैं जहाँ प्रथम ज्ञान ही ज्ञान (वेद) एवं सत्य का, शुद्ध आचरण का, गुणों का बोलबाला रहा है। हमें पुनः अपनी संस्कृति को जानने एवं सुखमय जीवन व्यतीत करने के लिए "वेदों की ओर लौटना पड़ेगा"।
**********