"परमेश्वर की भक्ति तथा विद्वान् से विद्या प्राप्त किए बिना कोई सुख नहीं"
स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य
वेद मंदिर, योल (हि.प्र.)
78 दिवसीय चल रहे चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य ने ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 77 के कुछ मंत्रों की व्याख्या करते हुए समझाया कि जो हम मनुष्यों के बीच में अत्यंत उत्तम मनुष्य है और वह मनुष्य उत्कृष्ट--गुण--विज्ञान वाली वेद वाणी से तथा रक्षा आदि से धारणा को चाहता है। वे लोग हमारी सभा में सभासद बनें। हाँ, यह भी जानना आवश्यक है कि ऐसे मनुष्य को ही वेद विद्वान्, ऋषि, मुनि, तपस्वी आदि पदों से सम्बोधित करते हैं।
स्वामी जी ने कहा, मनुष्यों को चाहिए कि श्रेष्ठ धर्मात्मा तथा वेदों के विद्वानों के साथ रहकर वेद--विद्याओं की शिक्षा प्राप्त करके और उन्हें आचरण में लाकर सदा सुखी रहें। वेद कहता है कि विद्वानों के संग और वेदानुसार परमेश्वर की उपासना के बिना मनुष्य न तो धन और न ही सुखों को प्राप्त कर सकते हैं और जो धन मनुष्य को वेद विद्या के विद्वानों से विद्या प्राप्त किए बिना तथा बिना विद्वानों के संग प्राप्त हो जाता है तो वह धन मनुष्य के सब सुख छीन लेता है। अत: यजुर्वेद मंत्र 18/11 के अनुसार शुद्ध धन जो मनुष्य को सुख देता है वह धन बिना वेद मंत्रों से किए यज्ञ से प्राप्त कदापि नहीं होता।