दु:खों का नाश और सुखों की बरसात


78 दिवसीय चारों वेदों के चल रहे यज्ञानुष्ठान के अवसर पर स्वामी राम स्वरूप, योगाचार्य जी ने श्रद्धालुओं को उपदेश देते हुए कहा कि ऋग्वेद मंत्र 1/22/15 में परमेश्वर ने जनता को सुख देने के लिए यह पृथिवि रचना की है। इस पृथिवी में किसी को भी दु:ख देने के लिए एक कांटा भी न लगे। इस भूमि पर ही पेड़, मनुष्य, पशु-पक्षी आदि अनगिनत मूर्तिमान पदार्थों का रहने का स्थान है। पृथिवी बहुत से रत्नों की दात्री है इत्यादि। परंतु आज के युग में जनता को वेद विद्या का ज्ञान न होने के कारण और यज्ञादि शुभ कर्म न करने के कारण पृथिवी हमें अधिकतर दु:ख ही दु:ख दे रही है।
वेद विद्या हमें यह उपदेश करती है कि यह पृथिवी केवल वेद विद्या वाले विद्वानों तथा सत्य को धारण करने वाले विद्वानों के लिए ही मधुरता पूर्ण वायु और समुद्र तथा नदियाँ मधुर गुणों की वर्षा करती हैं। अत: हम वेद विद्या के ज्ञाता विद्वानों से शिक्षा लेकर ऐसा प्रयत्न करें कि सृष्टि के पदार्थों से सब सुखों को प्राप्त करने के लिए विद्वानों से वेद विद्या की शिक्षा लें और उस पर आचरण करें। 
विद्वानों से वेद विद्या का ज्ञान प्राप्त न करने के कारण स्वभाविक ही है कि प्रत्येक नर-- नारी सुख की इच्छा करते हैं परन्तु जिस वेद मार्ग पर चलने से प्रभु की प्राप्ति होती है और सुख मिलते हैं, उस मार्ग पर चलने की इच्छा नहीं करते, तो यह कैसे संभव है कि कोई ईश्वर के नियम को तोड़कर सुखी हो जाए।

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